विशेषता:
“श्री माता शीतला देवी मंदिर की स्थापना 18 वीं शताब्दी में हिंदू जाट राजा जवाहर सिंह ने की थी। मंदिर ने नवरात्रि समारोहों में त्योहारों की एक विस्तृत श्रृंखला मनाई, जो भक्तों और आगंतुकों को आकर्षित करते हैं। भारतीय महाकाव्य महाभारत के अनुसार, यह मंदिर कृपाई को समर्पित है, जिन्हें गुरु द्रोणाचार्य की पत्नी ललिता भी कहा जाता है, जो पांडवों और कौरवों के शिक्षक भी थे। मंदिर विविध प्रकार के कार्यक्रमों और कार्यक्रमों का आयोजन करता है। मंदिर के कर्मचारी अपने आगंतुकों को विश्वसनीय और चौकस सेवाएं प्रदान करने के लिए समर्पित हैं। श्री माता शीतला देवी मंदिर भक्तों को ध्यान और प्रार्थना में डूबने के लिए एक गर्मजोशी भरा और स्वागत करने वाला वातावरण प्रदान करता है।
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2026 अपडेट: श्री माता शीतला देवी मंदिर एक व्यवस्थित कतार, एक कियोस्क, दान के लिए एक स्कैन, पीने के पानी और शौचालय की सुविधाओं सहित कई सुविधाएं प्रदान करता है।”








